Posts

Showing posts from February, 2026

लंकाकांड दोहा (45)

 लंकाकांड दोहा 45 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन: दो0-एक एक सों मर्दहिं तोरि चलावहिं मुंड। रावन आगें परहिं ते जनु फूटहिं दधि कुंड।।44।। भावार्थ: वानर वीर एक-एक राक्षस को कुचलते हुए उसके सिर तोड़कर उछाल देते हैं। वे कटे हुए सिर रावण के सामने इस प्रकार गिरते हैं, मानो दही से भरे मटके फूट-फूटकर गिर रहे हों। विस्तृत विवेचन: इस दोहे में तुलसीदास जी ने वानर सेना के अद्भुत पराक्रम और रावण की सेना की दयनीय दशा का अत्यंत प्रभावशाली चित्रण किया है। वानर वीरों का उत्साह और बल इतना प्रचंड है कि वे राक्षसों को एक-एक करके मारते हुए उनके सिर तोड़ डालते हैं। यह केवल शारीरिक बल का वर्णन नहीं, बल्कि धर्म की शक्ति का भी प्रतीक है। कटे हुए सिरों की तुलना “दधि कुंड” (दही के मटके) से करना एक सजीव उपमा है। जैसे दही के मटके टूटने पर दही चारों ओर फैल जाती है, वैसे ही राक्षसों के सिर रावण के सामने बिखरते चले जाते हैं। इससे रावण के अहंकार पर गहरा प्रहार होता है। वह अपने महलों में बैठा युद्ध की खबरें सुन रहा है, और उसके सामने अपने योद्धाओं के कटे हुए सिर गिरते देख उसका मन भय और ग्लानि से भर जाता है। यह दोहा य...

लंकाकांड चौपाई (402-409)

 लंकाकांड चौपाई (402-409) का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन: जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर। राम प्रताप सुमिरि उर अंतर।। रावन भवन चढ़े द्वौ धाई। करहि कोसलाधीस दोहाई।। कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।। नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती।। कपिलीला करि तिन्हहि डेरावहिं। रामचंद्र कर सुजसु सुनावहिं।। पुनि कर गहि कंचन के खंभा। कहेन्हि करिअ उतपात अरंभा।। गर्जि परे रिपु कटक मझारी। लागे मर्दै भुज बल भारी।। काहुहि लात चपेटन्हि केहू। भजहु न रामहि सो फल लेहू।। भावार्थ: राम के प्रताप का स्मरण कर क्रोध से भरे हुए दो वानर (अंगद और हनुमान) युद्ध के लिए उद्यत हो गए। वे वेगपूर्वक रावण के भवन पर चढ़ दौड़े और ‘कोसलाधीश श्रीराम की जय’ का घोष करने लगे। उन्होंने कलश सहित रावण का भवन ढहा दिया। यह देखकर रावण भयभीत हो गया। राक्षसों की स्त्रियाँ छाती पीट-पीटकर विलाप करने लगीं कि अब दो उत्पाती वानर आ पहुँचे हैं। वे दोनों वानर अपनी क्रीड़ाओं से सबको डराते हुए रामचंद्र जी के सुयश का गान करने लगे। फिर सोने के खंभों को पकड़कर उन्होंने उत्पात मचाने का संकल्प किया और शत्रु सेना के बीच कूद प...