लंकाकांड चौपाई (402-409)

 लंकाकांड चौपाई (402-409) का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर। राम प्रताप सुमिरि उर अंतर।।

रावन भवन चढ़े द्वौ धाई। करहि कोसलाधीस दोहाई।।

कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।।

नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती।।

कपिलीला करि तिन्हहि डेरावहिं। रामचंद्र कर सुजसु सुनावहिं।।

पुनि कर गहि कंचन के खंभा। कहेन्हि करिअ उतपात अरंभा।।

गर्जि परे रिपु कटक मझारी। लागे मर्दै भुज बल भारी।।

काहुहि लात चपेटन्हि केहू। भजहु न रामहि सो फल लेहू।।

भावार्थ:

राम के प्रताप का स्मरण कर क्रोध से भरे हुए दो वानर (अंगद और हनुमान) युद्ध के लिए उद्यत हो गए। वे वेगपूर्वक रावण के भवन पर चढ़ दौड़े और ‘कोसलाधीश श्रीराम की जय’ का घोष करने लगे। उन्होंने कलश सहित रावण का भवन ढहा दिया। यह देखकर रावण भयभीत हो गया। राक्षसों की स्त्रियाँ छाती पीट-पीटकर विलाप करने लगीं कि अब दो उत्पाती वानर आ पहुँचे हैं। वे दोनों वानर अपनी क्रीड़ाओं से सबको डराते हुए रामचंद्र जी के सुयश का गान करने लगे। फिर सोने के खंभों को पकड़कर उन्होंने उत्पात मचाने का संकल्प किया और शत्रु सेना के बीच कूद पड़े। गर्जना करते हुए वे भारी भुजबल से राक्षसों को मारने लगे—किसी को लातों से, किसी को थप्पड़ों से। वे स्पष्ट संदेश देते हैं कि जो राम का भजन नहीं करता, उसे ऐसा ही फल भोगना पड़ता है।

विस्तृत विवेचन:

यह चौपाई श्रीराम के प्रताप और उनके दूतों की अद्भुत वीरता को उजागर करती है। अंगद और हनुमान का क्रोध व्यक्तिगत नहीं, बल्कि अधर्म के विनाश हेतु धर्मोन्मुख ऊर्जा है। रावण के भवन का ध्वंस उसके अहंकार और असत्य साम्राज्य के टूटने का प्रतीक है। ‘कोसलाधीश की दोहाई’ यह दर्शाती है कि वानर अपनी शक्ति को राम के नाम से ही अर्थपूर्ण मानते हैं।

राक्षस स्त्रियों का विलाप लंका में फैले भय और अनिष्ट की सूचना देता है। कपियों की ‘लीला’ भय उत्पन्न करने के साथ-साथ राम के यश का प्रचार भी है—यह स्पष्ट करता है कि यह युद्ध केवल बल का नहीं, मर्यादा और धर्म का है। स्वर्ण खंभों का उखाड़ना भौतिक वैभव की नश्वरता का संकेत है। अंत में, शत्रु सेना का संहार यह शिक्षा देता है कि जो राम-विमुख है, उसे अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है।

समग्र रूप से यह चौपाई धर्म की विजय, अहंकार के पतन और रामभक्ति की सर्वशक्तिमत्ता का सशक्त चित्रण करती है।

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