लंका काण्ड दोहा (11)
लंका काण्ड दोहा 11 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
दो0-सुनासीर सत सरिस सो संतत करइ बिलास।
परम प्रबल रिपु सीस पर तद्यपि सोच न त्रास।।10।।
शब्दार्थ
सुनासीर – निरंतर
सत सरिस – सैकड़ों इंद्र के समान
संतत करइ बिलास – सदा भोग विलास में मग्न रहता है
परम प्रबल रिपु – अत्यंत शक्तिशाली शत्रु
सीस पर – सिर पर, अर्थात् संकट सामने खड़ा है
सोच न त्रास – न कोई चिंता, न भय
भावार्थ
निरंतर सैकड़ो इंद्र के समान रावण भोग विलास में डूबा हुआ है उनके सिर पर अत्यंत प्रबल और बलवान शत्रु राम जैसा बड़ा संकट उपस्थित है, फिर भी वे न तो चिंता करते हैं और न ही भयभीत होते है।
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