लंका काण्ड सोरठा (1)

 लंका काण्ड सोरठा 1 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन

सो0-सिंधु बचन सुनि राम सचिव बोलि प्रभु अस कहेउ।

अब बिलंबु केहि काम करहु सेतु उतरै कटकु।।

सुनहु भानुकुल केतु जामवंत कर जोरि कह।

नाथ नाम तव सेतु नर चढ़ि भव सागर तरिहिं।।

भावार्थ:

समुद्र देवता के बचन को सुनने के बाद राम जी अपने सचिव से कह रहे हैं कि अब सेना को सेतु पार करने में विलम्ब क्यों हो रहा है। इस पर जामवंत जी कह रहे हैं " हे भानुकुल (सूर्य वंशी राम) आपके नाम का स्मरण मात्र से मनुष्य भवसागर को पार कर जाता है 

निष्कर्ष: इस सोरठा में भगवान राम के नाम का महत्व बताया गया है, जिनके लेने मात्र से मनुष्य भवसागर को पार कर जाता है।




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