लंका काण्ड दोहा (37)

 

दो0-बधि बिराध खर दूषनहि लीँलाँ हत्यो कबंध।

बालि एक सर मारयो तेहि जानहु दसकंध।।36।।

भावार्थ

मंदोदरी रावण को समझाते हुए कहती है:

हे दशानन (रावण)! श्रीराम ने वीराध, खर-दूषण और कबन्ध जैसे महाबली राक्षसों का वध किया, तथा बाली को एक ही बाण से मार गिराया। इसलिए उनके पराक्रम को पहचानो और समझो कि उनसे युद्ध करना विनाश को बुलाना है।

विस्तृत विवेचन

इस दोहे में रावण को श्रीराम की अपार शक्ति और शौर्य का स्मरण कराया जा रहा है। मंदोदरी उदाहरण देकर बताती है कि—

वीराध, खर-दूषण और कबन्ध का वध – ये सभी अत्यंत बलवान राक्षस थे, जिन्हें श्रीराम ने सहजता से पराजित किया। इससे राम की अद्भुत वीरता सिद्ध होती है।

बाली का एक बाण से संहार – बाली जैसा महापराक्रमी योद्धा भी श्रीराम के एक ही बाण से मारा गया, जो राम के दिव्य पराक्रम का प्रमाण है।

भाव यह है कि  मंदोदरी रावण को अहंकार त्यागकर राम की शक्ति को समझने को कहती है।उनसे युद्ध करना अपनी ही पराजय को बुलाने जैसा है।


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