लंकाकांड चौपाई (455-462)
लंकाकांड चौपाई (455-462) का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
कहँ कोसलाधीस द्वौ भ्राता। धन्वी सकल लोक बिख्याता।।
कहँ नल नील दुबिद सुग्रीवा। अंगद हनूमंत बल सींवा।।
कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही। आजु सबहि हठि मारउँ ओही।।
अस कहि कठिन बान संधाने। अतिसय क्रोध श्रवन लगि ताने।।
सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।।
जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर।।
जहँ तहँ भागि चले कपि रीछा। बिसरी सबहि जुद्ध कै ईछा।।
सो कपि भालु न रन महँ देखा। कीन्हेसि जेहि न प्रान अवसेषा।।
भावार्थ :
मेघनाद कहता है—
“कहाँ हैं कोसलाधीश श्रीराम और उनके भाई लक्ष्मण, जो महान धनुर्धर और जगत में प्रसिद्ध हैं?
कहाँ हैं नल, नील, सुग्रीव, अंगद और बल के सागर हनुमान?
और कहाँ है विभीषण, जो अपने ही भाई का द्रोही बना है?
आज मैं इन सबको हठपूर्वक मार डालूँगा।”
ऐसा कहकर वह कठोर बाणों को कान तक खींचकर छोड़ता है।
उसके बाण ऐसे प्रतीत होते हैं मानो पंख वाले अनेक सर्प आकाश में दौड़ रहे हों।
उन बाणों की वर्षा से वानर-भालू सेना घायल होकर इधर-उधर गिरने लगती है।
कोई भी उसके सामने ठहर नहीं पाता।
सब युद्ध की इच्छा भूलकर भागने लगते हैं।
जिसे मेघनाद देख लेता, वह प्राण नहीं बचा पाता।
🔹 विस्तृत विवेचन
1️⃣ मेघनाद का वीरत्व और अभिमान
मेघनाद अत्यन्त पराक्रमी योद्धा था। उसने देवराज इन्द्र को भी पराजित किया था, इसलिए उसका नाम “इन्द्रजीत” पड़ा। यहाँ उसका आत्मविश्वास और अभिमान दोनों प्रकट होते हैं।
2️⃣ चुनौती और ललकार
वह सीधे श्रीराम और लक्ष्मण को ललकारता है। यह उसके साहस को दर्शाता है, पर साथ ही उसका अहंकार भी झलकता है।
3️⃣ बाणों की उपमा
“सर समूह” को “सपच्छ नाग” (पंख वाले सर्प) कहा गया है।
यह उपमा उनके तीव्र वेग, भयावहता और घातक प्रभाव को दर्शाती है।
यहाँ उपमा अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है।
4️⃣ वानर सेना की स्थिति
मेघनाद के प्रचंड प्रहार से वानर-भालू सेना भयभीत हो जाती है।
युद्ध की इच्छा भूलकर उनका भागना यह दर्शाता है कि शत्रु अत्यन्त शक्तिशाली था।
5️⃣ काव्यगत विशेषता
वीर रस और रौद्र रस का सुंदर चित्रण
उपमा अलंकार का प्रभावशाली प्रयोग
युद्ध दृश्य का सजीव वर्णन
🔹 निष्कर्ष
इस चौपाई में मेघनाद के पराक्रम, क्रोध और अभिमान का प्रभावशाली चित्रण हुआ है।
यह प्रसंग दिखाता है कि अधर्म की शक्ति भले ही कुछ समय के लिए प्रबल दिखे, पर अंततः विजय धर्म की ही होती है।
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