लंकाकांड दोहा (51)
लंकाकांड दोहा 51 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
दोहा:
दस दस सर सब मारेसि परे भूमि कपि बीर।
सिंहनाद करि गर्जा मेघनाद बल धीर।।50।।
भावार्थ :
मेघनाद ने एक-एक वानर पर दस-दस बाण चलाए।
वे सब वानर वीर भूमि पर गिर पड़े।
फिर मेघनाद सिंह के समान गर्जना करने लगा।
वह अपने बल और धैर्य का प्रदर्शन कर रहा था।
🔹 विस्तृत विवेचन
यहाँ मेघनाद (इंद्रजीत) की वीरता और युद्ध-कौशल का वर्णन है।
“दस दस सर” से उसकी तीव्र गति और अद्भुत धनुर्विद्या प्रकट होती है।
वानर सेना घायल होकर भूमि पर गिरती है — इससे युद्ध की भयंकरता स्पष्ट होती है।
“सिंहनाद” शब्द बताता है कि वह अत्यंत गर्व और उत्साह में था।
तुलसीदास जी यहाँ राक्षस पक्ष की शक्ति भी दिखाते हैं, ताकि आगे राम विजय और भी महिमामय लगे।
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