लंकाकांड चौपाई (634-645)

 लंकाकांड चौपाई (634-645) का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।।

चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी।।

यह निसिचर दुकाल सम अहई। कपिकुल देस परन अब चहई।।

कृपा बारिधर राम खरारी। पाहि पाहि प्रनतारति हारी।।

सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।।

राम सेन निज पाछैं घाली। चले सकोप महा बलसाली।।

खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।।

लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा।।

लीन्ह एक तेहिं सैल उपाटी। रघुकुल तिलक भुजा सोइ काटी।।

धावा बाम बाहु गिरि धारी। प्रभु सोउ भुजा काटि महि पारी।।

काटें भुजा सोह खल कैसा। पच्छहीन मंदर गिरि जैसा।।

उग्र बिलोकनि प्रभुहि बिलोका। ग्रसन चहत मानहुँ त्रेलोका।।

भावार्थ:

1. भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।।

👉 भालू और वानर ऐसे भाग रहे हैं जैसे भेड़िए को देखकर भेड़ें भागती हैं।

2. चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी।।

👉 सब डरकर भागते हुए दुखी स्वर में पुकार रहे हैं—“बचाओ!”

3. यह निसिचर दुकाल सम अहई। कपिकुल देस परन अब चहई।।

👉 यह राक्षस अकाल जैसा है, अब पूरी वानर सेना को खत्म कर देगा।

4. कृपा बारिधर राम खरारी। पाहि पाहि प्रनतारति हारी।।

👉 हे दयालु श्रीराम! हमारी रक्षा करो।

5. सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।।

👉 दीन वाणी सुनकर भगवान तुरंत धनुष-बाण लेकर चल पड़े।

6. राम सेन निज पाछैं घाली। चले सकोप महा बलसाली।।

👉 सेना को पीछे करके श्रीराम क्रोध में आगे बढ़े।

7. खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।।

👉 उन्होंने धनुष खींचकर बाण चलाए, जो कुंभकर्ण के शरीर में लग गए।

8. लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा।।

👉 बाण लगते ही कुंभकर्ण क्रोध में दौड़ा, धरती डगमगाने लगी।

9. लीन्ह एक तेहिं सैल उपाटी। रघुकुल तिलक भुजा सोइ काटी।।

👉 उसने पर्वत उठाया, पर श्रीराम ने उसका एक हाथ काट दिया।

10. धावा बाम बाहु गिरि धारी। प्रभु सोउ भुजा काटि महि पारी।।

👉 फिर दूसरे हाथ से हमला किया, वह भी श्रीराम ने काट दिया।

11. काटें भुजा सोह खल कैसा। पच्छहीन मंदर गिरि जैसा।।

👉 बिना हाथ के वह ऐसा लग रहा था जैसे बिना पंख का पर्वत।

12. उग्र बिलोकनि प्रभुहि बिलोका। ग्रसन चहत मानहुँ त्रेलोका।।

👉 वह क्रोध से श्रीराम को देख रहा है, मानो तीनों लोकों को निगल जाएगा।

🔶 2 पॉइंट मे सार:

कुंभकर्ण का आतंक और वानर सेना का डर दिखाया गया है।

श्रीराम की शक्ति से उसका विनाश शुरू हो जाता है।

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