लंकाकांड दोहा (67)

 

दो0-सुनु सुग्रीव बिभीषन अनुज सँभारेहु सैन।

मैं देखउँ खल बल दलहि बोले राजिवनैन।।67।।

भावार्थ:

भगवान श्रीराम कहते हैं—

“हे सुग्रीव! और विभीषण और लक्ष्मण(अर्थात् सेना के प्रमुख योद्धाओं), तुम सब सेना को संभालो। मैं स्वयं इस दुष्ट (कुंभकर्ण) की सेना और उसके बल को देखता हूँ।”

🔹 विस्तृत विवेचन (2 मुख्य बिंदु)

1. नेतृत्व और जिम्मेदारी का विभाजन

यहाँ श्रीराम एक आदर्श राजा की तरह कार्य कर रहे हैं।

वे सुग्रीव और विभीषण को सेना संभालने का आदेश देते हैं।

खुद सबसे कठिन कार्य (कुंभकर्ण से मुकाबला) अपने ऊपर लेते हैं।

👉 सीख: सच्चा नेता कठिन काम खुद करता है, बाकी जिम्मेदारी सही लोगों को देता है।

2. साहस और धर्म की रक्षा

“खल बल दल” = दुष्ट कुंभकर्ण की विशाल सेना।

श्रीराम निर्भय होकर कहते हैं कि वे स्वयं उसका सामना करेंगे।

👉 यह दिखाता है कि धर्म के लिए लड़ते समय भय नहीं होना चाहिए।

🔹 निष्कर्ष :

👉 श्रीराम का यह दोहा सिखाता है—

सही नेतृत्व + निडरता = विजय।


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