लंकाकांड चौपाई (836-843) एवं छंद
लंकाकांड चौपाई (836-843) एवं छंद का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा। उपजा उर अति छोभ बिसेषा।।
सुरपति निज रथ तुरत पठावा। हरष सहित मातलि लै आवा।।
तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा।।
चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।।
रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी।।
सही न जाइ कपिन्ह कै मारी। तब रावन माया बिस्तारी।।
सो माया रघुबीरहि बाँची। लछिमन कपिन्ह सो मानी साँची।।
देखी कपिन्ह निसाचर अनी। अनुज सहित बहु कोसलधनी।।
छं0-बहु राम लछिमन देखि मर्कट भालु मन अति अपडरे।
जनु चित्र लिखित समेत लछिमन जहँ सो तहँ चितवहिं खरे।।
निज सेन चकित बिलोकि हँसि सर चाप सजि कोसल धनी।
माया हरी हरि निमिष महुँ हरषी सकल मर्कट अनी।।
भावार्थ :
देवताओं ने देखा कि भगवान राम पैदल ही युद्ध कर रहे हैं, इससे उनके मन में चिंता (छोभ) हुई।
तब इन्द्र ने तुरंत अपना दिव्य रथ भेजा, जिसे मातलि लेकर आए।
राम जी उस दिव्य रथ पर बैठ गए। रथ बहुत तेज और सुंदर था, उसके घोड़े अमर और मन के समान गति वाले थे।
जब वानर सेना ने राम जी को रथ पर देखा, तो उनका उत्साह बढ़ गया और वे जोर से युद्ध करने लगे।
रावण के सैनिक उनकी मार सह नहीं पाए, तब रावण ने माया (illusion) रच दी।
उस माया को राम जी समझ गए, लेकिन लक्ष्मण और वानरों को वह सच लगी।
माया में अनेक राम और लक्ष्मण दिखने लगे, जिससे वानर-भालू डर गए—उन्हें लगा हर जगह राम-लक्ष्मण खड़े हैं, जैसे चित्र बने हों।
फिर राम जी ने हँसकर अपने बाण से उस माया को एक क्षण में नष्ट कर दिया, जिससे वानर सेना फिर खुश हो गई।
🔹 विस्तृत विवेचन:
देवताओं की चिंता
यहाँ दिखाया गया है कि भगवान होकर भी राम मानव रूप में संघर्ष करते हैं। यह “लीला” है—धर्म की स्थापना के लिए।
इन्द्र का रथ भेजना
यह संकेत है कि जब धर्म संकट में होता है, तो दैवी शक्तियाँ सहायता करती हैं।
वानरों का उत्साह
नेतृत्व (राम जी) मजबूत हो तो सेना का मनोबल अपने आप बढ़ जाता है।
रावण की माया
रावण केवल बल से नहीं, बल्कि छल (illusion) से भी युद्ध करता है—यह अधर्म की नीति है।
माया का प्रभाव
साधारण जीव (वानर, लक्ष्मण) भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन सच्चा ज्ञान (राम) माया को पहचान लेता है।
राम द्वारा माया नाश
यह दर्शाता है कि सत्य और ज्ञान हमेशा भ्रम (illusion) को नष्ट कर देते हैं।
🔹 मुख्य संदेश (2 points में)
सत्य और ज्ञान (राम) हमेशा माया और भ्रम पर विजय पाते हैं।
अच्छे नेतृत्व से ही संकट में भी सेना (समाज) का मनोबल बढ़ता है।
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