लंकाकांड दोहा (89)

 लंकाकांड दोहा (89) का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

दो0-बहुरि राम सब तन चितइ बोले बचन गँभीर।

द्वंदजुद्ध देखहु सकल श्रमित भए अति बीर।।89।।

भावार्थ :

भगवान राम सभी योद्धाओं की ओर देखकर गंभीर वचन बोले कि अब तुम सब द्वंद्व युद्ध (एक-एक करके युद्ध) देखो, क्योंकि सभी वीर अत्यधिक थक चुके हैं।

विस्तृत विवेचन :

इस दोहे में युद्ध की स्थिति दिखाई गई है जहाँ लंबा संग्राम चलते-चलते दोनों पक्षों के वीर थक गए हैं। तब भगवान राम परिस्थिति को समझते हुए युद्ध की दिशा बदलते हैं और द्वंद्व युद्ध का आदेश देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि राम केवल पराक्रमी ही नहीं, बल्कि एक कुशल रणनीतिकार भी हैं। वे अनावश्यक जनहानि रोकना चाहते हैं और युद्ध को मर्यादित व नियंत्रित रूप देना चाहते हैं। उनके “गंभीर वचन” उनके नेतृत्व, धैर्य और न्यायप्रियता को दर्शाते हैं।

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